एक दृढ़, विशालकाय पर्वत को
हर क्षण मिटते देख रही हूँ
जो बातें करता था अम्बर से
उसे धरा पे गिरते देख रही हूँ
मेरा ये कोमल ह्रदय,
काँप उठता है इस परिवर्तन पर,
किंचित, ऐसा ही लगता होगा
जब तलवार धरी हो गर्दन पर
समय बड़ा बलवान है,
सुनते आई थी ये बचपन से
कठोर प्रहार उस क्रूर समय का
अपनों पे पड़ते देख रही हूँ
एक दृढ़, विशालकाय पर्वत को
हर क्षण मिटते देख रही हूँ
जो बातें करता था अम्बर से
उसे धरा पे गिरते देख रही हूँ
Sunday, 21 February 2016
घर की बारात
बड़े दिनों के बाद घर की शादी' और बारात अटेंड करने का मौका मिला. मज़ा आ गया। मेरे घर के, हमारी जनरेशन के सबसे छोटे बेटे .. यानी घर में मेरे सबसे छोटे भाई की शादी थी। ऑफिस व अन्य उत्तरदायित्वों के कारण सीधे शादी वाले दिन ही पहुंच सकी. बड़े दिनों बाद बिल्कुल बेफिक्री के कुछ घंटे बिताये। पर इस बार, बारात में एन्जॉय करने' के साथ ही मैंने कुछ बातों पे गौर भी किया. कुछ मज़ेदार और कुछ संवेदनशील बातें. बारात में भाइयों में जो प्रेम दिखता है वो और कभी नहीं. कम से कम अपने यहाँ की शादियों में तो मैंने यही महसूस किया है. ज़ाहिर सी बात है वो प्यार तो होता ही है पर वो प्यार, शादी के माहौल और कुछ सोमरस के पान के कारण बिलकुल उबाल मारने लगता है. अरे मैंने तो बिना सोमरस पान के भी खुद में उस उबाल को महसूस किया है. सब भाइयों-भाभियों, दीदी -जीजा जी लोग जो बहुत महीनों या सालों से नहीं मिले, जब किसी गाने पे same स्टेप फॉलो कर देते हैं, उस समय जो ख़ुशी मिलती है वो न तो पीएचडी के पेपर्स पब्लिश कर के मिली थी और ना ही अपनी पहली सैलरी पाके . .. .सच्ची। !
अच्छा, कुछ लोगों का कॉम्बिनेशन भी होता है डांस का' जो' चाहे कितने भी दिनों के बाद मिले हो बारात में इक - दूसरे को पकड़ ही लेते हैं और सबको आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता से परिपूर्ण कर देते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ नागिन डांस स्पेशलिस्ट होते हैं। मेरे यहाँ तो कई हैं. मैंने इस बार विशेष गौर किया। नागिन धुन बजते ही उनकी आखों में एक विशेष चमक आ जाती है। मेरे तीन भाई इस विधा के विशेष जानकार हैं। (कहने को तीनो अलग अलग भाइयों की संताने हैं पर जो प्यार इन तीनों में आपस में है, वो किसी को अपनी बीवी और बच्चों से भी नहीं। नज़र न लगे). हाँ , तो मैं बता रही थी की नागिन धुन बज़ने का आर्डर मिलने पे बैंड वाला जितने कॉन्फिडेंस के साथ अपना वो म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट उठाता है, उससे ज़्यादा कॉन्फिडेंस से मेरा एक भाई अपनी जेब से रूमाल निकल कर उसको बीन की शकल देता है। होता तो ये हर बार ही होता होगा पर इस बार चूँकि मैं' काफी analysing मूड में थी , मुझे बहुत अच्छा लगा , और वो सीन मेरी आँखों से जा ही नहीं रहा। और फिर बाकी के दो और साथ में कुछ अन्य पार्टिसिपेंट्स नागिन का जो रूप धरते हैं, अवणर्नीय है , इतना आकर्षक कि , मैं भी खुद को रोक न सकी. ये प्रसंग तब तक संपूर्ण नहीं माना जाता जब तक कोई एक या २-३ लोग अपने सूट के गंदे होने या बीवी द्वारा बाद में दिए जाने वाले पुरस्कार के भय को भी पराजित कर रोड पर ही लेट जाते हैं. सच्ची , उस समय दिल में' उपजे भावों को शब्दों में व्यक्त कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है.
एक और ध्यान देने वाली बात होती है, हमारे यहाँ.... शायद आप लोगों के यहाँ भी होती हो,........ एक स्पेशलिस्ट और होते हैं जो बैंड वालों को हड़का के लोगों की फरमाइशी गाने बजवाते हैं. मेरे बड़े भैया इस काम के माहिर हैं: कुछ लोग उनको डॉन कह के बुलाते हैं। चाहे किसी को भांगड़ा बजवाना हो , या किसी को नागिन बनना हो, किसी को आज मेरे यार की शादी है ..बताने का मन हो , या किसी को (जैसे की मुझे) जिमि जिमि जिमि पे ट्विस्ट करना हो; भइया उस बैंड के शोर में भी एक बार कान में बताने पर ही सुन लेते हैं और बैंड वाला भी उनके एक बार कहने पर ही बजा देता है ; उनकी एक और खास बात बताती हूँ जब जोश बहुत ज़्यादा बढ़ गया हो तो चूँकि मेरे यहाँ सब गाने के भी शौक़ीन हैं तो भइया बैंड वाले के साथ साथ माइक भी संभाल लेते हैं. वैसे कई बारातों में मैंने ये काम पापा को भी करते देखा है। इस बार पापा की तबियत खराब होने के वजह से ,मज़ा थोड़ा कम हो गया था ..लेकिन पापा का मोस्ट फेवरिट गाना जो वो हर बारात में गाते थे (हम लोगों के साथ बरात अटेंड किये हुए सभी लोग इस बात से इत्तफाक रखेंगे).... सौ साल पहले हमें तुमसे प्यार था....इस बार भी मैरिज लॉन के बाहर पहुचने पे बजवाया गया ...पापा भी अंदर बैठे सुन रहे थे और आँखों में आंसू लिए मुस्कराते भी रहे। (To be continued......)
अच्छा, कुछ लोगों का कॉम्बिनेशन भी होता है डांस का' जो' चाहे कितने भी दिनों के बाद मिले हो बारात में इक - दूसरे को पकड़ ही लेते हैं और सबको आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता से परिपूर्ण कर देते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ नागिन डांस स्पेशलिस्ट होते हैं। मेरे यहाँ तो कई हैं. मैंने इस बार विशेष गौर किया। नागिन धुन बजते ही उनकी आखों में एक विशेष चमक आ जाती है। मेरे तीन भाई इस विधा के विशेष जानकार हैं। (कहने को तीनो अलग अलग भाइयों की संताने हैं पर जो प्यार इन तीनों में आपस में है, वो किसी को अपनी बीवी और बच्चों से भी नहीं। नज़र न लगे). हाँ , तो मैं बता रही थी की नागिन धुन बज़ने का आर्डर मिलने पे बैंड वाला जितने कॉन्फिडेंस के साथ अपना वो म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट उठाता है, उससे ज़्यादा कॉन्फिडेंस से मेरा एक भाई अपनी जेब से रूमाल निकल कर उसको बीन की शकल देता है। होता तो ये हर बार ही होता होगा पर इस बार चूँकि मैं' काफी analysing मूड में थी , मुझे बहुत अच्छा लगा , और वो सीन मेरी आँखों से जा ही नहीं रहा। और फिर बाकी के दो और साथ में कुछ अन्य पार्टिसिपेंट्स नागिन का जो रूप धरते हैं, अवणर्नीय है , इतना आकर्षक कि , मैं भी खुद को रोक न सकी. ये प्रसंग तब तक संपूर्ण नहीं माना जाता जब तक कोई एक या २-३ लोग अपने सूट के गंदे होने या बीवी द्वारा बाद में दिए जाने वाले पुरस्कार के भय को भी पराजित कर रोड पर ही लेट जाते हैं. सच्ची , उस समय दिल में' उपजे भावों को शब्दों में व्यक्त कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है.
एक और ध्यान देने वाली बात होती है, हमारे यहाँ.... शायद आप लोगों के यहाँ भी होती हो,........ एक स्पेशलिस्ट और होते हैं जो बैंड वालों को हड़का के लोगों की फरमाइशी गाने बजवाते हैं. मेरे बड़े भैया इस काम के माहिर हैं: कुछ लोग उनको डॉन कह के बुलाते हैं। चाहे किसी को भांगड़ा बजवाना हो , या किसी को नागिन बनना हो, किसी को आज मेरे यार की शादी है ..बताने का मन हो , या किसी को (जैसे की मुझे) जिमि जिमि जिमि पे ट्विस्ट करना हो; भइया उस बैंड के शोर में भी एक बार कान में बताने पर ही सुन लेते हैं और बैंड वाला भी उनके एक बार कहने पर ही बजा देता है ; उनकी एक और खास बात बताती हूँ जब जोश बहुत ज़्यादा बढ़ गया हो तो चूँकि मेरे यहाँ सब गाने के भी शौक़ीन हैं तो भइया बैंड वाले के साथ साथ माइक भी संभाल लेते हैं. वैसे कई बारातों में मैंने ये काम पापा को भी करते देखा है। इस बार पापा की तबियत खराब होने के वजह से ,मज़ा थोड़ा कम हो गया था ..लेकिन पापा का मोस्ट फेवरिट गाना जो वो हर बारात में गाते थे (हम लोगों के साथ बरात अटेंड किये हुए सभी लोग इस बात से इत्तफाक रखेंगे).... सौ साल पहले हमें तुमसे प्यार था....इस बार भी मैरिज लॉन के बाहर पहुचने पे बजवाया गया ...पापा भी अंदर बैठे सुन रहे थे और आँखों में आंसू लिए मुस्कराते भी रहे। (To be continued......)
Sunday, 13 September 2015
Dar....
दर्दे बयां पे मेरे, वो करते हैं वाह वाह
बताते हैं मुझे रास्ता, जो खुद ही हैं गुमराह
किससे कहूँ मैं हाल, करूँ किसपे ऐतबार
तूफ़ान से था जो डर, वो अब तुझसे है ऐ मल्लाह
Monday, 13 July 2015
miss u...!
आज मेरे सपनों में फिर तुम आये थे
मुझे छू के अपने हाथों से मुस्काये थे
कितना मेरा मन था कि तुम कुछ बात करो
फिर से रोशन हम सब के तुम दिन रात करो
जब से हो गए तुम, सूना घर का आँगन है
चंदा के बिना खाली सा सारा आनन है
तारों में तुमको ढूंढा है , मैंने हर रात
अक्सर महसूस किया है, वो प्यारे नरम से हाथ
जब भी सपनों में ऐसे छू के जाते हो
आँखें खुलने पर याद बहुत तुम आते हो…
Friday, 29 May 2015
अप्रत्याशित जीवन
इस अप्रत्याशित जीवन में
कल क्या होगा ये नहीं है ज्ञात
कुछ बातें लगती अंत कभी
कभी लगती जैसे हो शुरुआत
कभी तिमिर भला सा लगता है
कभी चुभता सा है ये प्रभात
कभी दोनों ही प्रिय लगते हैं
हो उज्जवल दिन या श्यामल रात
इन गूढ़ रहस्यों का बोधन
इतना भी सरल नहीं होगा
कि हर कोई सब जान ही ले
कुछ तो कारण होंगे अज्ञात
Thursday, 23 April 2015
‘क्यूँ मौसम बदल रहा है’?
आज किसी ने ये समझाया, ‘मौसम बदल रहा है’
ज़रा गौर किया, मैंने भी पाया ‘मौसम बदल रहा है’
पहले तो बारिश आँसू साथ नहीं लाती थी
पहले तो नहीं ये, खेतों को, यूं झुलसाती थी
अब तो सागर लहरों से, है तूफान मचाता
अब तो बादल फटता है, जो खुशियाँ था लाता
उफ्फ़ ये मौसम बदल रहा है’, क्यूँ ये ‘मौसम बदल रहा है’
अब क्या है कारण, जो मैंने, ये सोचना चाहा
कुछ बातें याद दिला के, दिल भारी हो आया
इंसान हों, या हो नीयत, अब तो हैं सब बिक जाते
क्या नज़र है, क्या है सीरत, पल में, बदल ये जाते
फिर बड़ी है, क्या ये बात, जो ये ‘मौसम बदल रहा है’
जो लोरी सुन के सोते थे, अब ताने वो हैं सुनाते
ऐसे भी अभागे हैं कुछ, जो, बेटों से मारे जाते
क्यूँ ना दिन ये चैन खोये औ बेसुकूँ हों ये रातें
जो अब अपने शहरों में इन्सान हैं काटे जाते
फिर क्यूँ अचरज में हर आँख है, जो ‘ये मौसम बदल रहा है’
---- भावना
Wednesday, 22 April 2015
विवेक और मन
जब भी विवेक और मन में, इक अंतर्द्वंद सा चलता है…
बहुधा मन ही विजयी होता , चाहे विवेक जो कहता है.
मन को तो वो करना है, जो भी उसको अच्छा लगता है
अपनी बातें मनवाने को वो, सौ -सौ कारण देता है
यदि कभी जो मन 'तार्किक' हो जाए, ऐसे तर्क बताता है
बुद्धि-विवेक चकरा जाते हैं, मन मंद-मंद मुस्काता है
बहुधा मन ही विजयी होता , चाहे विवेक जो कहता है.
मन को तो वो करना है, जो भी उसको अच्छा लगता है
अपनी बातें मनवाने को वो, सौ -सौ कारण देता है
यदि कभी जो मन 'तार्किक' हो जाए, ऐसे तर्क बताता है
बुद्धि-विवेक चकरा जाते हैं, मन मंद-मंद मुस्काता है
Thursday, 2 April 2015
वक़्त
ना छोड़ के जा, यूं खफा न हो, ना कर मुझको बेज़ार
माना तू आज नहीं मेरा, आखें जो ऐसे चुरा रहा
इक रोज़ तो मेरा ही होगा, फिर क्यूँ करना तकरार
Tuesday, 31 March 2015
नहीं चाहिए मोक्ष मुझे
कुछ शक्ति ढूंढ रहे हैं, तो कुछ युक्ति ढूंढ रहे हैं
तेरी इस सुंदर दुनिया से, कुछ मुक्ति ढूंढ रहे हैं
बस इतना सक्षम कर देना, कर्तव्य कभी भी लगे न भार
मैं क्यूँ ढूंढ़ू फिर शांतिमार्ग, मैं क्यूँ ढूंढ़ू कोई मुक्ति-द्वार
नहीं चाहिए मोक्ष मुझे, इसकी मुझको क्यूँ हो दरकार
तुमने ही दिया है मेरे सारे सपनों को सच में आकार
कुछ शब्दों में कैसे लिख दूँ, मुझ पर तेरे कितने उपकार
उत्कृष्ट तथा संतुष्ट हैं जो, मुझे स्नेह मिला उनसे अपार
मैंने जाने किन कर्मों के प्रतिफल में पाया ये उपहार
नहीं चाहिए मोक्ष मुझे, इसकी मुझको क्यूँ हो दरकार
ये नीला सा आकाश, मुझे ऊंचा उठना सिखलाता है
इस सबल धरा का धैर्य सदा, संयम का पाठ पढ़ाता है
ये नदियां, और ये झरने, सन्देश त्याग का देते हैं
ये वृक्ष फलों से झुके हुए, अभिमान तजो ये कहते हैं
इक क्षण में मेरे संशय सब, कर देते हैं ये निराधार
नहीं चाहिए मोक्ष मुझे, इसकी मुझको क्यूँ हो दरकार
इस रंग मंच के पात्र सभी, इस मंचन में हँसना-रोना
मुझको तो अच्छा लगता है बंधन में बंध के भी रहना
मिट्टी के इक पुतले को तुम, कैसे करते हो यूं साकार
कोटि-कोटि है नमन तुम्हें, हो सर्वश्रेष्ठ तुम रचनाकार !
जो आपने इतने मनोयोग से रचा है ये सुंदर संसार
नहीं चाहिए मोक्ष मुझे, इसकी मुझको क्यूँ हो दरकार
---भावना
Tuesday, 3 March 2015
Tuesday, 15 July 2014
Some million dollars questions
लगभग 5 साल हो गए हैं, जब मैंने उसे पहली बार देखा था.... गोरा-चिट्टा रंग-रूप , गुलाबी होंठ, घुंघराले, पीछे को लौटते, काले बाल और थोड़ा पहाड़ी सा लुक' … मुझे बहुत प्यारा लगा था … जैसे जैसे वो मेरी ज़िन्दगी में शामिल होता गया ,सब कुछ बदलने सा लगा.… बात उन दिनों की है जब हम लोग शिमला में थे और मैं यूनिवर्सिटी से पोस्ट -डॉक् कर रही थी। कुछ दिनों बाद वो मेरे साथ यूनिवर्सिटी आने -जाने भी लगा था। दिन बदलते रहे और मेरी दुनिया भी … ! फिर हम शिमला से गोरखपुर और गोरखपुर से लखनऊ … हमारा रिश्ता नए -नए डाइमेंशन्स लेता रहा और मुझे खुशियां देता रहा।
दरअसल मैं बात कर रही हूँ अपने प्यारे-राजदुलारे की (उसे मेरा प्यारा-राजदुलारा कहना बहुत पसंद है )। वो कहता है अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ ! मुझे उसकी बात पे हंसी भी आती है और प्यार भी। उसके घुंघराले बाल कब सीधे हो गए मुझे तो पता ही नहीं चला और वो पहाड़ी-सा चेहरा भी पूरी तरह से यूपी के रंग ढंग में बदल गया है ........ हालाँकि कुछ लोग कहते हैं कि वो मेरे जैसा दिखता है। मैंने ग़ौर किया वो थोड़ा बड़ा तो हुआ है .......... पर उसकी बातें कुछ ज़्यादा ही बड़ी.... ! जब मैं online shopping sites पे कुछ देख रही होती हूँ, तो उसका पूरा इन्वॉल्वमेंट मुझे गुदगुदा देता है और जब कहीं जाना हो तो उसका ये कहना कि माँ ! ये वाली ड्रेस पहनिए , मुझे ये color बहुत अच्छा लगता है आपके ऊपर; तो मुझे उसके पहले से बड़े होने का एहसास दिला देता है और हाल ही में जब उसने कहा कि माँ ! मेरे पूरे coins मिलाके 58 हो गए हैं ; इतने में आपकी साड़ी मिल जायेगी माँ ? कितना अच्छा लगा होगा ये समझना ज़्यादा मुश्किल नहीं।
आजकल इक चर्चा घर'में बड़े ज़ोरों पे है और कुछ million dollars questions भी। माँ ! मेरा happy b'day आने वाला है.आप मुझे क्या 'surprize' gift देंगी ? b'day बनारस से होगा या लखनऊ से........? माँ ! मुझे कुछ "IDEA" आये हैं , आप सुनेंगी........ ? माँ ! कौन -कौन आएगा........? क्या-क्या होगा........? मेरा plan ये है कि........ ........ ........etc. मैं भी सोच रही हूँ इन प्रश्नों के समुचित उत्तर ; जो इन्हे संतुष्ट कर पायें. आप सबकी शुभकामनायें अपेक्षित हैं। (To be continued........... most probably)
Monday, 4 November 2013
Diwali
वो नादान हैं जो कहते हैं कि मौसम बदल रहा है…
ये तो किसी के आँखों की नमी है जो दुवाओं में है, हवाओं में है....
जब भी दिए जलाये, उन्हें महसूस किया है.....
ये उनकी ही तो खुशबू है, जो फ़िजाओं में है...हवाओं में है.…
Tuesday, 2 July 2013
DARD..
जो हमने दर्द बयाँ किया, तो वो कहते हैं वाह-वाह ... !
बड़ा ज़ोरों का तूफां है, संभलना ऐ मेरे मल्लाह ........!!!
Sunday, 12 May 2013
Letter to the world's best mother from a good daughter (not d best).....!
courtesy:https://encrypted-tbn1.gstatic.com /images?q=tbn:ANd9GcSK9KNoCm9bQAK9hbqDArfLRzuGgIHBWfWzIytiS6YFcD-j-l39SQ
Dear Maa,
Thanks for being the best !!! and
more sincere thanks for being mine…… as it makes my life so fine……!
I always wanted to thank you for
everything u did & doing for me but I couldn’t …. as I found that mere words
are so insufficient but today I can’t resist myself to write this as everyone
is talking about his/her mother and their relations. We also share such a
beautiful bond! Isn’t it? So, I have to tell
you lots of things…….
I clearly remember those days,
when I was a kid and you had little to spent but you'd very successfully
managed to made me look pretty enough by making a beautiful frock even by some old
shirts of Papa. Thanks for that…….!
Even today, I remember your all
of those stories and can very easily recall the tunes of your Lories. I do remember
your efforts to make me understand the morals of those stories. Thanks for inculcating
moral values & noble thoughts in me and initiating the making of a good
human (as I think I am... :-) )…..
!
I remember your hard work to make
me capable in securing first rank in my classes during schooling and proud
tears in your eyes. You always appreciated and inspired me. You always made me
feeling myself very special even on my very small achievements. Whatever, I am
today, is just because of you. Thanks for that… !
Sometimes, I wondered that how you
are so strongly capable to search any file, any copy or any dress from messed
up heaps of goods. I think it is your love for your children who works as an
especial searchlight. Really, I am sorry for getting you on nerves on thousands
of times. Love you mamma..!
During my boards or other exams I
had always found you beside me during my late night studies; it not only made
me awaken but your tight hugs during my ten minutes power naps used to give me
so much of power, strength and confidence. I used to say, “Mummy! Kuchh yaad
nahi hai...sab bhool raha hai” & you encouraged me by saying “paper dekhte
hi sab yaad aa jayega”…. And really those words were so magical at that time. Thanks
for that…….! I am also thankful to you for arranging my books when I left those
scattered before going to exams. I am really sorry too for that……!!!
I am one among those lucky persons
who have enjoyed most tasty and delicious dishes & cuisines. It is also
because of you. There is a long list containing items which cannot be prepared well
than of you even by any master chef. I am also thankful to you for providing me
meals even on bed during my exams and being so patient when I was frustrated
and rude. Please forgive me for all of my mistakes and faults.
Earlier, I was more closed to
papa and was less expressive but when I started staying in hostels, I missed
you so badly….. Yes, I was totally dependent on you right from my file covers
to tiding of my hairs but I missed you not only because of my dependency on you
but also because I love you so much and it was very difficult for me to live
far from you. At that time, I realized truly, how much I love you and I was
able to see your tears too even on hostel land-line phone for that we had
decided the time of 5 AM as rest of the time it was very difficult to get call
on that….! Thanks for being so punctual at that time…!!!
I found you to be the first person
who supported me always, in each and every problem, who helped me in all my
difficult situations and circumstances and believe me you, were awesome…!! You were
always capable to make me come out. I know very well that undoubtedly, you are
the person who loves me the most. I love you too my mamma. Thanks for giving me
so much unconditional love and support and please always be there as my
strongest point because even now, I am absolutely dependent on you and never
want to be independent in this regard.
I am really thankful to you for
being my teacher, friend and guide whatever I needed. In all forms, you are the
best. I do enjoy your company too much; either its shopping or gossiping.
Recently, when I saw you enjoying video games, I came to know from
where I got so keen interest in crossing these levels and achieving targets on
active games. Really, I enjoy this too much with Abhas and you.
I know very well that you
sacrificed your life for family, for us without any complaints. Now, as I am
too a mother, I can understand in a better way that how many sacrifices and
efforts you made for us, for our happiness. Thanks a lot for everything Maa!!! Really these words are absolutely insufficient
to express my feelings and your greatness for me but I just want to say only
this………. I love you so much Mummy! And u r the best…….!!! Thanks for being the
best !!! and more sincere thanks for being mine…… as it makes my life so fine……!
Yours
‘Soni’ (Bhawana)
Thursday, 25 April 2013
RESPECT WOMEN
courtesy: https://encrypted-tbn3.gstatic.com/images?q=tbn:ANd9GcQuja3Lew6ltETVbhwpR07zzXXJEmI2J2-5uad0HbOpDSMS8qqV
मन में उमड़े हैं फिर बादल, सोचा कुछ आज लिखूं मैं
दिल की इन स्याह सी बातों से, कुछ पन्ने आज रंगू मैं .......
इक गहरा सन्नाटा सा छाया है मेरे अन्दर ...
कुछ प्रश्नों के पर शोर भी हैं, जो चुभते जैसे नश्तर ..
हम तो मनुष्य थे, सभ्य भी थे, सुसंस्कृत भी ..
पर अब क्यूँ बनने लगे पशु, दानव और पत्थर ...
क्या वो भूल गए, कलियों से ही खिलता है गुलशन..?
ये भी भूल गए कि हम ही करते थे कन्या पूजन ...?
बहन-बेटी जैसे शब्द तो उनको याद ही होंगे ...?
या ये भी भूल गए कि किसने उन्हें दिया जीवन ..?
मानव जन्म मिला है , न करें कुकृत्य इसे लजाने का
उस गर्त में भी ना गिर जायें कि साहस ही न हो उठ पाने का
अब वक़्त है उन्हें चेताने का, ये सब कुछ याद दिलाने का ..
नारी का अर्थ नहीं है बस, आहत होकर सह जाने का ..
यदि नारी ममता है, तो शक्ति भी है, वो श्रद्धा है, धरती भी है….
वो कोमल है, तो ऊर्जा भी है, यदि लक्ष्मी है, तो दुर्गा भी है….
हे अबला ! अब सबला बन के, तुझे अपनी लाज बचाना होगा ..
आ गए कई 'महिषासुर' हैं; 'दुर्गा ' बन उन्हें मिटाना होगा ....
मन में उमड़े हैं फिर बादल, सोचा कुछ आज लिखूं मैं
दिल की इन स्याह सी बातों से, कुछ पन्ने आज रंगू मैं .......
Saturday, 13 April 2013
आज प्रथम है साक्षात्कार

courtesy..http://goodtoknow.media.ipcdigital.co.uk/111/000000de4/72f9_orh220w334/mother-son-coat-winter-school-outside-play.wjpg.jpg
उसका इस बाहरी दुनिया से
आज प्रथम है साक्षात्कार
होना ये आवयश्क भी है
ये ही देगा उसको आकार .......
इन बातों से अवगत भी हूँ
उत्साह भी मेरे मन में है
किन्तु ढेरों संशय भी हैं
जो उठते गिरते हैं हर बार…
प्रारंभ हुआ संघर्ष नया
चलने का, गिर कर उठने का
दुनिया के हर पैमाने पर ..
खुद को अब साबित करने का .
बने वो एक अच्छा इन्सान
इस माँ का है ये आशीर्वाद ..
उसके इस निश्छल से मन को
सदा मिले बस प्यार ही प्यार ..
Tuesday, 5 February 2013
new resolution
अब नाविक ने ठान लिया है, नौका पार लगाने को..
वो तूफां हों, या भवँर हों वो, उनसे कह दो रुक जाने को...:-)
वो तूफां हों, या भवँर हों वो, उनसे कह दो रुक जाने को...:-)
Wednesday, 7 November 2012
होड़
कहाँ गई मनुष्य की मनुष्यता नहीं पता ...
क्यूँ हैं होड़ हर मोड़ पर, कोई मुझे भी दे बता
भागते से हैं सभी, आँख कान मींच के
साथ आत्मा नहीं, शरीर ही को खींच के ..
भावना, चेतना, संवेदना को छोड़ के ..
कहाँ ले जा के छोड़ेगा, देखें हमें ये रास्ता ..
क्यूँ हैं होड़ हर मोड़ पर, कोई मुझे भी दे बता ..
सब कुछ है पर लगता है कम, सबको आगे ही निकलना है ..
अब रहना नहीं दिलों में, अब तो चाँद पे ही रहना है .
प्यासा भ्रमित सा नर यहाँ जिसके लिए भटक रहा .
वो लक्ष्य ही है, या कोई मरीचिका नहीं पता ......
क्यूँ हैं होड़ हर मोड़ पर, कोई मुझे भी दे बता
लगती अजीब बात है, पर सच भी तो है यही ..
बन गए मकान कितने, घर मगर घर ना रहा ..
देखा किसी को चाटते, जूठे से जब पत्तल कहीं ..
हम कर रहे विकास ये, दंभ भी अब ना रहा ..
क्यूँ हैं होड़ हर मोड़ पर, कोई मुझे भी दे बता ..
कहाँ गई मनुष्य की मनुष्यता नहीं पता ...
क्यूँ हैं होड़ हर मोड़ पर, कोई मुझे भी दे बता .....
Sunday, 21 October 2012
नासमझ मन

(courtesy: http://smsinhindi.net/wp-content/uploads/2012/06/A-Sad-Girl-Photo.jpg)
फिर आज है मन कुछ उखड़ा-सा, कहता भी नहीं कि बात है क्या
फिर किसी के तीखे वाणों से,पंहुचा तुझको आघात है क्या?
इस दुनिया की बातों से यूँ तू क्यूँ हो जाता है बेकल ..
है कितनी बार कहा तुझसे, तू लक्ष्य को देखा कर केवल
है जग की तो बस रीत यही, दूजे हैं गलत, बस आप सही
निष्ठुर शब्दों, आक्षेपों से, होना तुझको है व्यग्र नहीं ..
इन व्यर्थ ज़रा सी बातों पर, यूँ तेरा गिरना अनुचित है
इन घावों को प्रेरक ही समझ,ये घाव नहीं, ये अमृत हैं,
इन बड़े बड़े उपदेशों से, मैंने मन को उत्साह दिया
नासमझ, बावरे मन ने मेरे, पर मुझसे तब ये प्रश्न किया
कोई तो हो, जो ये सोचे, क्या मुझको अच्छा लगता है।
यूँ तो कितनी ही बार मुझे, बस जीना-मरना पड़ता है
ये बेगाने और अपने से, हैं शब्द बने बोलो क्यूँ कर,
जब सबको ही दुःख देना है, तो साथ है क्या और क्या है घर?
इस अप्रत्याशित प्रश्न का तब, उत्तर क्या हो सूझा न मुझे
मैं भी थी खड़ी उखड़ी उखड़ी , इस मन ने लिया उलझा ही मुझे
Monday, 15 October 2012
Happy durga pooja.....
I have just seen ENGLISH VINGLISH...............very sweet movie.......again an example by a woman that she can do anything if she really wants to do...........I just salute this spirit of all women as I know every woman carries it......Well, Happy Navratri and DURGA POOJA to all of u...... especially my female friends!!!...as u ( a WOMAN) only know how to manage ur home, ur kids, ur boss, ur office, ur work, ur parents, ur in-laws, ur friends, ur feelings and ur DREAMS........AND SO ON......I m trying my best to satisfy at least myself and I know u all r doing too!!!!!!!!!!!! May Goddess Durga give u all the power, strength and peace of mind!!!! ALL D VERY BEST!!!!!!!!!!!!!! :-)
Subscribe to:
Posts (Atom)